संत कबीर दास के 51 दोहे – Kabir Das biography in Hindi संत कबीर दास जीवनी हिंदी में

संत कबीर दास के 51 दोहे

Kabir Das biography in Hindi संत कबीर दास जीवनी

नमस्कार दोस्तों, सबसे पहले हमारी वेबसाइट www.best1collection.com में मै आपका स्वागत करता हूँ| दरअसल आज हम आपके साथ बहुत ही खास विषय पर बात करने वाले है| और वो है| संत कबीर दास के 51 दोहे – Kabir Das biography in Hindi संत कबीर दास जीवनी हिंदी में आप सब इस बात को बखूबी जानते है| कबीर दस एक शानदार कवि थे|

आईए जानते है संत कबीर दास के 51 दोहे और कबीर दास जीवनी के बारे में कुछ ख़ास बाते|

           संत कबीर का जीवन परिचय हिंदी में 

   कबीर दास का जन्म एवं मृत्यु के बारे में

पूरा नाम – संत कबीरदास
जन्म    – c.1440
जन्मस्थान– लहरतारा
विवाह   – पत्नी का नाम लोई

                   संत कबीरदास का जन्म कब हुआ

संत कबीरदास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के इकलौते ऐसे कवि हैं, जो आजीवन समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। वह कर्म प्रधान समाज के पैरोकार थे| वैसे तो संत कबीर दस ने एक हिन्दू परिवार में जन्म लिया तथा उनका पालन पोषण एक मुस्लिम परिवार में हुआ| कबीर दास के दोहे ने लोगे के मन को काफी प्रभावित किया|

नीरू और उसकी बीवी नीमा ने कबीर को पाल पोस कर बड़ा किया जो की मुसलमान थे और कपड़ा बुनने का कार्य किया करते थे| बड़े होकर कबीर ने भी कपडे बुनने का कार्य प्रारंभ किया| उन्होंने विवाह किया और एक साधारण जीवन व्यतीत किया उनका उद्देश्य समाज की प्रचलित त्रुटिओ और लोगो के अन्धविश्वास के विरुद्ध संघर्ष करना था|

संत कबीरदास के विचार हिन्दू और मुसलमान दोनों से ऊपर थे| वह ये चाहते थे की हिन्दू और मुसलमान दोनों की आँखे खुले और धर्म एवं जाति के भेद न रहे|

                 कबीर दास की मृत्यु कैसे हुई जानिये 

15 शताब्दी के सूफी कवि कबीर दास के बारे में ऐसा माना जाता है कि उन्होंने अपने मरने की जगह खुद से चुनी थी, मगहर, जो लखनउ शहर से 240 किमी दूरी पर स्थित है। लोगों के दिमाग से मिथक को हटाने के लिये उन्होंने ये जगह चुनी थी उन दिनों, ऐसा माना जाता था कि जिसकी भी मृत्यु मगहर में होगी वो अगले जन्म में बंदर बनेगा और साथ ही उसे स्वर्ग में जगह नहीं मिलेगी।

कबीर दास की मृत्यु काशी के बजाय मगहर में केवल इस वजह से हुयी थी क्योंकि वो वहाँ जाकर लोगों के अंधविश्वास और मिथक को तोड़ना चाहते थे। 1575 विक्रम संवत में हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ शुक्ल एकादशी के वर्ष 1518 में जनवरी के महीने में मगहर में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। ऐसा भी माना जाता है| कि जो कोई भी काशी में मरता है वो सीधे स्वर्ग में जाता है

कबीर की मृत्यु मगहर में हुई। उनकी मृत्यु पर उनके अनुयायियों में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हुआ। कहते हैं कि जब शव की चादर उठाई गई तो उसके नीचे कुछ फूल पड़े थे। दरअसल कबीर क्रांतिद्रष्टा युग-पुरुष थे।

संत कबीर दास के 51 दोहे
संत कबीर दास के 51 दोहे

       संत कबीर दास के 51 दोहे – 51 Sant Kabir Das Quotes 

  • कबीरपंथियों में इनके जन्म के विषय में यह पद्य प्रसिद्ध है-
  •  चौदह सौ पचपन साल गए, चन्द्रवार एक ठाठ ठए।

      जेठ सुदी बरसायत को पूरनमासी तिथि प्रगट भए॥

      घन गरजें दामिनि दमके बूँदे बरषें झर लाग गए।

      लहर तलाब में कमल खिले तहँ कबीर भानु प्रगट भए॥

 

  •   रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।

            हीरा जन्म अमोल था, कोड़ी बदले जाय ॥

 

  •     दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय।

            जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ॥

 

  •  बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।

           पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर ॥

 

        संत कबीर दास के लोकप्रिय दोहे

  •  साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय।

           सार-सार को गहि रहै थोथा देई उडाय॥

 

  •  तिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पाँव तले होय ।

         कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीर घानेरी होय ॥

 

  •   जो तोको काँटा बुवै ताहि बोव तू फूल।

             तोहि फूल को फूल है वाको है तिरसुल॥

 

  •   उठा बगुला प्रेम का तिनका चढ़ा अकास।

           तिनका तिनके से मिला तिन का तिन के पास॥

 

  • सात समंदर की मसि करौं लेखनि सब बनराइ।

      धरती सब कागद करौं हरि गुण लिखा न जाइ॥

 

  • साधू गाँठ न बाँधई उदर समाता लेय।

      आगे पाछे हरी खड़े जब माँगे तब देय॥

 

  • माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।

       कर का मन का डार दें, मन का मनका फेर ॥

 

  • बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर ।

       पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर ॥

 

  • तिनका कबहूँ न निंदिये जो पावन तर होए 

      कभू उडी अँखियाँ परे तो पीर घनेरी होए 

संत कबीर दास के 51 दोहे
संत कबीर दास के 51 दोहे
  • साँई इतना दीजिए जामें कुटुंब समाय ।

       मैं भी भूखा ना रहूँ साधु न भुखा जाय॥

 

  • माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । 

       एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥

 

  • माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर । 

       कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर ॥

 

  • गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पाँय । 

       बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो मिलाय ॥

 

  • पाथर पूजे हरि मिले , तो मैं पूजू पहाड़ 

        घर की चाकी कोई ना पूजे, जाको पीस खाए संसार 

 

  • दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय |

    मरी खाल की सांस से, लोह भसम हो जाय ||

  • अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,

    अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

 

  • बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,

    हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।

 

  • कबीरा खड़ा बाज़ार में, सबकी मांगे खैर.

    ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर.

 

  • कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी ।

    एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पाँव पसारी ।।

 

  • रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।

    हीरा जन्म अमोल सा, कोड़ी बदले जाय ॥

 

  • हरिया जांणे रूखड़ा, उस पाणी का नेह।

    सूका काठ न जानई, कबहूँ बरसा मेंह॥

 

  • कबीर थोड़ा जीवना, मांड़े बहुत मंड़ाण।

    कबीर थोड़ा जीवना, मांड़े बहुत मंड़ाण॥

 

  • झिरमिर- झिरमिर बरसिया, पाहन ऊपर मेंह।

    माटी गलि सैजल भई, पांहन बोही तेह॥

 

  • इक दिन ऐसा होइगा, सब सूं पड़े बिछोह।

    राजा राणा छत्रपति, सावधान किन होय॥

 

  • कबीर प्रेम न चक्खिया,चक्खि न लिया साव।

    सूने घर का पाहुना, ज्यूं आया त्यूं जाव॥

 

  • मान, महातम, प्रेम रस, गरवा तण गुण नेह।

    ए सबही अहला गया, जबहीं कह्या कुछ देह॥

 

  • जाता है सो जाण दे, तेरी दसा न जाइ।

    खेवटिया की नांव ज्यूं, घने मिलेंगे आइ॥

Best 51 Kabir Das dohas – संत कबीर दास के 51 दोहे 

  • मानुष जन्म दुलभ है, देह न बारम्बार।

    तरवर थे फल झड़ी पड्या,बहुरि न लागे डारि॥

 

  • यह तन काचा कुम्भ है,लिया फिरे था साथ।

    ढबका लागा फूटिगा, कछू न आया हाथ॥

 

  • मैं मैं बड़ी बलाय है, सकै तो निकसी भागि।

    कब लग राखौं हे सखी, रूई लपेटी आगि॥

 

  • कबीर बादल प्रेम का, हम पर बरसा आई ।

    अंतरि भीगी आतमा, हरी भई बनराई ॥

 

  • जिहि घट प्रेम न प्रीति रस, पुनि रसना नहीं नाम।

    ते नर या संसार में , उपजी भए बेकाम ॥

 

  • लंबा मारग दूरि घर, बिकट पंथ बहु मार।

    कहौ संतों क्यूं पाइए, दुर्लभ हरि दीदार॥

 

  • इस तन का दीवा करों, बाती मेल्यूं जीव।

    लोही सींचौं तेल ज्यूं, कब मुख देखों पीव॥

  • नैना अंतर आव तू, ज्यूं हौं नैन झंपेउ।

    ना हौं देखूं और को न तुझ देखन देऊँ॥

 

  • कबीर रेख सिन्दूर की काजल दिया न जाई।

    नैनूं रमैया रमि रहा  दूजा कहाँ समाई ॥

 

  • कबीर सीप समंद की, रटे पियास पियास ।

    समुदहि तिनका करि गिने, स्वाति बूँद की आस ॥

 

  • सातों सबद जू बाजते घरि घरि होते राग ।

    ते मंदिर खाली परे बैसन लागे काग ॥

 

  • जांमण मरण बिचारि करि कूड़े काम निबारि ।

    जिनि पंथूं तुझ चालणा सोई पंथ संवारि ॥

 

  • बिन रखवाले बाहिरा चिड़िये खाया खेत ।

    आधा परधा ऊबरै, चेती सकै तो चेत ॥

 

  • कबीर देवल ढहि पड्या ईंट भई सेंवार ।

    करी चिजारा सौं प्रीतड़ी ज्यूं ढहे न दूजी बार ॥

 

  • कबीर मंदिर लाख का, जडियां हीरे लालि ।

    दिवस चारि का पेषणा, बिनस जाएगा कालि ॥

 

  • हू तन तो सब बन भया करम भए कुहांडि ।

    आप आप कूँ काटि है, कहै कबीर बिचारि॥

 

  • मैं मैं मेरी जिनी करै, मेरी सूल बिनास ।

    मेरी पग का पैषणा मेरी  गल की पास ॥

 

  • मन जाणे सब बात जांणत ही औगुन करै ।

    काहे की कुसलात कर दीपक कूंवै पड़े ॥

 

  • करता था तो क्यूं रहया, जब करि क्यूं पछिताय ।

    बोये पेड़ बबूल का, अम्ब कहाँ ते खाय ॥

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दोस्तों, मुझे विश्वास है की आज का टॉपिक आपको बहुत पसंद आया होगा की संत कबीर दास के 51 दोहे – Kabir Das biography in Hindi संत कबीर दास जीवनी हिंदी में अगर आप इस पोस्ट से रिलेटेड कुछ भी क्वेरी करना चाहते है तो comment कर के पूंछ सकते है| अगली बार फिर मिलेंगे एक नई post के साथ|

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